Happy Children's Day - A Day of Joy
बाल दिवस: बच्चों की शिक्षा, प्यार एवं अधिकारों का उत्सव
हर वर्ष 14 नवम्बर को भारत में बाल दिवस (Children’s Day) बड़े उत्साह और प्रेम से मनाया जाता है। यह दिन भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की जयंती के रूप में मनाया जाता है। नेहरू जी को बच्चों से बहुत स्नेह था और बच्चे उन्हें प्यार से “चाचा नेहरू” कहते थे। जवाहरलाल नेहरू जी के अनुसार, “आज के बच्चे कल के देश के निर्माता हैं।”
देवेंद्र मोहन ’’भैया जी’’ जो कि रजनी केयर फाउंडेशन के फाउण्डर हैं, वे बताते हैं कि बच्चों में शुरूआत से सद्गुण डालने का प्रयास किया जाना चाहिए। उनको अपने आस-पास हो रहे माहौल से सकारात्मक चीज़ों को ग्रहण करने के लिए समझाना चाहिए। भैया जी अपने आध्यात्मिक वाणियों में बच्चों को उनके भविष्य को लेकर कई बातों पर अमल करने के लिए माता-पिता को प्रेरित करते रहें है। उनके अनुसार यदि माता-पिता चाहते हैं कि उनके बच्चे सही आचरण, सही खान-पीन आदि को धारण करें तो उससे पहले उनके माता-पिता को उन्हीं गुणों को अपने अंदर विकसित करना चाहिए। बच्चे अपने बड़ों को देखकर सीखते हैं न कि सिर्फ समझाने से।
देवेंद्र मोहन ’’भैया जी’’ लाईफ कोच, मोटिवेशनल स्पीकर तथा आध्यात्मिक गुरू भी हैं। उन्होंने अपने कई सत्संगों में कहा है कि एक घर माता-पिता के आपसी सहयोग से चलता है, बच्चों में भी सहयोग की भावना तभी पैदा होती है जब वे अपने परिवारजनों को आपसी सहायता, सेवा आदि करता हुआ देखते हैं। ’’भैया जी’’ बाल दिवस को केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि यह बच्चों के अधिकारों, शिक्षा, स्वास्थ्य और उज्जवल भविष्य की याद दिलाने वाला दिन बताते हैं। उनकी दृष्टि में बाल दिवस ऐसा दिन है जो कि याद दिलाता है कि हर बच्चे को समान अवसर, सुरक्षा और प्यार मिलना चाहिए। इस दिन समाज को यह सोचने का अवसर मिलता है कि हम अपने बच्चों को कैसी परवरिश, शिक्षा और वातावरण दे रहे हैं। भैया जी का मानना है कि हर बच्चे को शिक्षा, प्यार और सम्मान मिलना चाहिए ताकि वह अपने सपनों को साकार कर सके।
देवेंद्र मोहन ’’भैया जी’’ के अनुसार बाल दिवस का सीधा सम्बन्ध हमारे भविष्य की नींव से हैं, यदि हम अपने बच्चों को सही रूप में शिक्षा का महत्व याद दिलाएंगे तो कल एक सुखद एवं जागरूक समाज बनेगा। बच्चों को अपनी भावनाओं को व्यक्त करने की हमेशा आज़ादी देनी चाहिए, इससे हमें पता लगेगा कि बच्चे का दिमागी विकास तथा वो अपने आस-पास के समाज को किस रूप में देख रहा है। भैया जी ने अपनी कई व्याख्यानों में कहा है कि हर बच्चे को सुरक्षित वातावरण और स्वस्थ जीवन का हक है तथा हर बच्चे को अपने विचार और भावनाएँ व्यक्त करने की आजादी होनी चाहिए। वे कहते हैं कि बच्चों की मुस्कान, शिक्षा और सुरक्षा हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।
भैया जी बताते हैं कि बच्चों को सबसे सुदंर देने वाला उपहार ’प्रेम’ है। प्रेम से हम बच्चों के हृदयों को जीत सकते हैं तथा उन्हें खेल-खेल में हम बहुत कुछ सिखा सकते हैं जो कि हम उन्हें डॉंट के भी नहीं सिखा सकते। वे कहते हैं कि हर माता-पिता, शिक्षक और समाज का दायित्व है कि वे बच्चों के सपनों को उड़ान देने में सहयोग करें। भावनात्मक उपहार के रूप में माता-पिता बच्चों के साथ गुणवत्तापूर्ण समय बिताएं, उन्हें खुद अपना उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए कि हम किस तरह अपने बच्चों को सही मार्गदर्शन दे सकते हैं। हर बच्चे का हृदय तभी जीता जा सकता है जब वो महसूस करें कि वह बच्चा अपने आप में विशेष है।
भैया जी द्वारा संचालित गैर-लाभकारी संस्था ’’रजनी केयर फ़ाउंडेशन’’ (आर0सी0एफ0) द्वारा समाज से तिरस्कृत ऐसे बच्चे जो शिक्षा तथा अपने निजी जरूरतों से वंचित हैं, उनके लिए आर0सी0एफ0 खाने, शिक्षा तथा उनकी जरूरतों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध रूप से काम कर रही है। संस्था द्वारा समय-समय पर गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करने वाले बच्चों के लिए कार्य किया जाता रहा है। भैया जी ने कहा है कि हम सभी को मिलकर यह संकल्प लेना चाहिए कि हर बच्चे को खुशहाल, सुरक्षित और शिक्षित जीवन मिले।